देहरादून: उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) की उत्तर प्रदेश से परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े मामले में 5,900 करोड़ रुपये की मांग वाली याचिका पर बुधवार को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में जनसुनवाई हुई। हालांकि, सुनवाई को लेकर अपेक्षित सार्वजनिक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली। याचिका पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए केवल एक उद्यमी आयोग के समक्ष पहुंचे।

आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद की अध्यक्षता में हुई जनसुनवाई करीब आधे घंटे में समाप्त हो गई। इस दौरान इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के प्रतिनिधि और उद्यमी राजीव अग्रवाल ने UPCL की याचिका पर आपत्ति दर्ज कराई।
राजीव अग्रवाल ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी UPCL परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े मामले का स्थायी समाधान नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से हस्तांतरित परिसंपत्तियों का भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
5,900 करोड़ की मांग का क्या है आधार?
जनसुनवाई के दौरान UPCL के अधिकारियों ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वर्ष 2003 में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और UPCL के बीच ट्रांसफर स्कीम के तहत 1,058 करोड़ रुपये की सकल अचल संपत्ति हस्तांतरित की गई थी। हालांकि, गणना के दौरान केवल 508 करोड़ रुपये की संपत्ति को आधार माना गया।
UPCL का कहना है कि इस अंतर के कारण निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी आधार पर निगम ने इक्विटी पर रिटर्न और ब्याज समेत कुल 5,900 करोड़ रुपये की मांग आयोग के समक्ष रखी है। इस राशि में कैरिंग कॉस्ट भी शामिल है।
आयोग के समक्ष दर्ज हुई आपत्ति
उद्यमी राजीव अग्रवाल ने मांग की कि परिसंपत्तियों के बंटवारे से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति का भौतिक परीक्षण कराया जाए। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण वित्तीय मामले में परिसंपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन और सत्यापन जरूरी है।
जनसुनवाई में आयोग के सदस्य प्रशांत किशोर डिमरी और अनुराग शर्मा के साथ आयोग के सचिव नीरज सती भी मौजूद रहे। अब आयोग UPCL की याचिका और सुनवाई के दौरान सामने आए पक्षों पर विचार के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगा।




